illusion

Mind Emotions & Self Mastery
Life Purpose, Work & Wisdom
Relationships & Connection
Devotion & Spritual Practice
Karma Cycles & Life Challenges

"तुम अकेले नहीं हो — 'मैं' और 'मेरा' के भ्रम की कहानी"
प्रिय शिष्य,
जब हम अपने अंदर गहराई से झांकते हैं, तो अक्सर एक आवाज़ सुनाई देती है — "मैं हूँ," "यह मेरा है," "मेरा अधिकार है।" यह आवाज़ हमें अपनी पहचान देती है, लेकिन क्या यह सचमुच हमारा असली स्वरूप है? या फिर यह केवल एक भ्रम है, जो हमें सीमित करता है? आज हम भगवद गीता के प्रकाश में इस भ्रम को समझने का प्रयास करेंगे।

अपने भीतर की अनिश्चितता से दोस्ती करें
साधक, जब मन की दुनिया अस्थिर हो, जब पहचान और व्यक्तित्व की छाया हमें डगमगाए, तब यह समझना बहुत जरूरी है कि यह अस्थिरता तुम्हारे अस्तित्व का हिस्सा है, न कि अंत। तुम अकेले नहीं हो; हर व्यक्ति के मन में यह लहरें उठती हैं। भगवद गीता हमें इस भ्रम से उबरने और स्थिरता की ओर बढ़ने का मार्ग दिखाती है।

भय के सागर में एक दीपक: तुम अकेले नहीं हो
साधक, जब मन में भय और चिंता की लहरें उठती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे जीवन का प्रकाश बुझ सा गया हो। परंतु जान लो, यह भय एक माया है — एक भ्रम, जो तुम्हारे असली स्वरूप को छुपा देता है। भगवद गीता हमें इस माया से मुक्त होने का मार्ग दिखाती है। चलो, इस गूढ़ विषय पर गीता के प्रकाश में विचार करें।

भय के सागर में डूबे नहीं, बल्कि सागर को पार करें
साधक, जब मन में अनावश्यक भय और अविवेक की छाया छा जाती है, तो लगता है जैसे जीवन की राहें धुंधली हो गई हों। पर याद रखो, तुम अकेले नहीं हो—यह अनुभव हर मानव के मन में कभी न कभी आता है। भगवद गीता में ऐसे भय और भ्रम को दूर करने का जो अमृतमयी संदेश है, उसे समझना तुम्हारे लिए प्रकाश का दीपक बनेगा।

भय के सागर में अकेले नहीं हो तुम
प्रिय शिष्य, जब भय का साया मन पर छा जाता है, तो ऐसा लगता है जैसे हम एक अंधकारमय गुफा में फंस गए हों। पर यह जान लो कि भय मन की ही एक रचना है, एक कल्पना है जो हमें सीमित करती है। तुम्हारे भीतर वह शक्ति है जो इस भय को दूर कर सकती है। चलो, भगवद गीता की दिव्य दृष्टि से इस प्रश्न का उत्तर खोजते हैं।